सुबह-शाम के अज़कार — असल हिफ़ाज़त

बुनियादी अज़कार

  • आयतुल कुर्सी — हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद, और दिन के दोनों सिरों पर। हदीस में इसके साथ एक निगहबान मुक़र्रर होने का ज़िक्र है जो सुबह तक रहता है।
  • सूरह इख़्लास, फ़लक़ और नास — तीन-तीन बार, सुबह और शाम। नबी ﷺ ने फ़रमाया कि ये हर चीज़ से कफ़ायत करती हैं।
  • पनाह के अल्फ़ाज़: अऊज़ु बि कलिमातिल्लाहित्ताम्माति मिन शर्रि मा ख़लक़ — मैं अल्लाह के कामिल कलिमात की पनाह चाहता हूँ हर उस चीज़ के शर से जो उसने पैदा की। शाम को तीन बार पढ़ने से रात भर हिफ़ाज़त रहती है।
  • बिस्मिल्लाहिल्लज़ी ला यज़ुर्रु मअस्मिही शैउन फ़िल-अर्ज़ि वला फ़िस्समाइ व हुवस्समीउल अलीम — तीन बार, सुबह और शाम।

पाबंदी शिद्दत से बेहतर क्यों है

अल्लाह को सबसे ज़्यादा महबूब वह अमल है जिस पर दवाम हो, अगरचे थोड़ा हो।

जो शख़्स साल भर हर सुबह-शाम यह पढ़ता रहा, उसने वह चीज़ बना ली जो कोई एक लंबी नशिस्त नहीं बना सकती। इन्हें दो ऐसे कामों से जोड़ दीजिए जो आप वैसे भी नहीं छोड़ते — फ़ज्र के बाद, और मग़रिब के बाद — फिर ये भूलेंगे नहीं।

घर के लिए

घर में सूरह अल-बक़रा की तिलावत रखिए, ख़ुद पढ़ कर या तिलावत चला कर। हदीस में है कि जिस घर में सूरह बक़रा पढ़ी जाए, शैतान उससे भागता है। बच्चों को हिफ़ाज़त के बारे में कुछ और सिखाने से पहले ये तीन सूरतें सिखाइए।

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क़ुरआन की तिलावत और नबी ﷺ की दुआओं से इलाज साबित और पसंदीदा है। मना वह चीज़ें हैं जो उसके साथ मिला दी जाती हैं: गिनतियाँ, ग़ैर-अल्लाह के नाम, और ग़ैब के दावे पर उजरत।

27 जुलाई 2026 पढ़ें
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