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फ़तवा एक शख़्स के सवाल का, उसी के हालात में जवाब होता है। सवाल के बग़ैर फैलाया जाए तो वह कुछ और बन जाता है जो वह कभी था ही नहीं, और फ़तवों के अकसर झगड़े यहीं से शुरू होते हैं।
पुस्तकालय
अक़ीदा, फ़िक़्ह, तारीख़ और समकालीन सवालों पर लेख और शोध टिप्पणियाँ।
फ़तवा एक शख़्स के सवाल का, उसी के हालात में जवाब होता है। सवाल के बग़ैर फैलाया जाए तो वह कुछ और बन जाता है जो वह कभी था ही नहीं, और फ़तवों के अकसर झगड़े यहीं से शुरू होते हैं।
बच्चा उस चीज़ की नक़्ल जल्दी करता है जो वह ख़ुशी से होते हुए देखे, बनिस्बत उसके जिसका उसे हुक्म दिया जाए। घर में नमाज़, याद दिलाने और टोकने का फ़र्क़, और वह उम्र जहाँ से सख़्ती शुरू होती है, इन पर अमली बातें।
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