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मुफ़्ती सैयद मोहम्मद आलम मदारी

हाफ़िज़-ए-क़ुरआन · क़ारी · आलिम · मुफ़्ती · पीएच.डी. (हदीस)

मकनपुर शरीफ़, कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश, भारत

रूहानी इलाज

प्रकाशित
25 जुलाई 2026
विषय
दुआ व ज़िक्र
मूल भाषा
اردو

सुबह-शाम के अज़कार — असल हिफ़ाज़त

इस्लाम में सबसे भरोसेमंद रूहानी हिफ़ाज़त कोई तावीज़ नहीं। यह एक मुख़्तसर, मुक़र्रर वज़ीफ़ा है जो दिन में दो बार, हर रोज़ पढ़ा जाए।

बुनियादी अज़कार

पाबंदी शिद्दत से बेहतर क्यों है

अल्लाह को सबसे ज़्यादा महबूब वह अमल है जिस पर दवाम हो, अगरचे थोड़ा हो।

जो शख़्स साल भर हर सुबह-शाम यह पढ़ता रहा, उसने वह चीज़ बना ली जो कोई एक लंबी नशिस्त नहीं बना सकती। इन्हें दो ऐसे कामों से जोड़ दीजिए जो आप वैसे भी नहीं छोड़ते — फ़ज्र के बाद, और मग़रिब के बाद — फिर ये भूलेंगे नहीं।

घर के लिए

घर में सूरह अल-बक़रा की तिलावत रखिए, ख़ुद पढ़ कर या तिलावत चला कर। हदीस में है कि जिस घर में सूरह बक़रा पढ़ी जाए, शैतान उससे भागता है। बच्चों को हिफ़ाज़त के बारे में कुछ और सिखाने से पहले ये तीन सूरतें सिखाइए।