01
پانچ وقت کی نماز ہر عاقل، بالغ مسلمان مرد و عورت پر فرض ہے
पुस्तकालय
इबादत, ख़ानदान, तिजारत और रोज़मर्रा के मसाइल पर लिखित फ़तावा, हर एक के साथ विषय, तारीख़ और संदर्भ संख्या।
پانچ وقت کی نماز ہر عاقل، بالغ مسلمان مرد و عورت پر فرض ہے
जो मुसाफ़िर अपने शहर से मुक़र्ररा फ़ासले की नीयत से निकले, वह चार रकअत वाली नमाज़ें दो कर देता है। दो नमाज़ों को एक वक़्त में जमा करना अलग मसला है, और इसमें हनफ़ी मौक़िफ़ आम गुमान से ज़्यादा तंग है।
कोई विषय आज़माइए
आपने खोजा
आप ऑफ़लाइन हैं। सिर्फ़ वही खुलेगा जो आपने सहेजा है।
सवाल