मुफ़्ती सैयद मोहम्मद आलम मदारी
हाफ़िज़-ए-क़ुरआन · क़ारी · आलिम · मुफ़्ती · पीएच.डी. (हदीस)
मकनपुर शरीफ़, कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश, भारत
रोज़ाना की दुआएँ
- प्रकाशित
- 28 जुलाई 2026
- विषय
- दुआ व ज़िक्र
- मूल भाषा
- اردو
नींद से जागने की दुआ
तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं, जिसने हमें मौत देने के बाद ज़िंदगी दी, और उसी की तरफ़ लौटना है।
الْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُSahih al-Bukhari 6312
तलफ़्फ़ुज़: Alhamdu lillahil-ladhi ahyana ba‘da ma amatana wa ilayhin-nushur
तर्जुमा: तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं, जिसने हमें मौत देने के बाद ज़िंदगी दी, और उसी की तरफ़ लौटना है।
कब पढ़ें
जागते ही, बिस्तर से उठने से पहले पढ़ें। हदीस में नींद को छोटी मौत और जागने को छोटी क़यामत कहा गया है — ये अल्फ़ाज़ आने वाले पूरे दिन को उसी के सुपुर्द कर देते हैं जिसने उसे लौटाया।